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झारखण्ड

पर्यावरण संरक्षण की नीति में बदलाव की जरूरत: सरयू राय

रांची। धातु एवं खनिज प्रकृति से मिला बेहतरीन उपहार है, जिससे कई तरह के आवश्यक धातु तत्व बनाये जाते हैं l धातु संशोधन तथा संधारणीय विकास के संदर्भ में एसोचैम की तरफ से 3 एम (मेटल्स , माइनिंग , मेटलर्जी) धातु , खनिज एवं धातु संसोधन के ऊपर समिट कम अवार्ड कार्यक्रम का आयोजन शुक्रवार को किया गया । इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि खाद्य विभाग के मंत्री सरयू राय, खनिज और विभाग के सचिव अबूबकर सिद्दीकी, उद्योग विभाग के निदेशक मुकेश कुमार थे । कार्यक्रम में प्राकृतिक संसाधनों को बिना बरबाद किये किस तरह से पुनः प्रयोग में लाया जाए तथा संधारणीय विकास की ओर किस तरह से कदम बढाया जा सके उस पर विशेष चर्चा हुई। मुख्य अतिथि सरयू राय ने 3 एम के बारे में प्रतिक्रिया रखते हुए बताया कि सही तरीके के धातु संशोधन से राज्य एवं देश का विकास हो सकता है। उन्होंने खनिजों के निष्कर्षण और प्रबंधन को देश के आर्थिक विकास की समग्र रणनीति में एकीकृत करने के बारे में जानकारी दी एवं पर्यावरण संरक्षण की नीति में बदलाव लाने का सुझाव दिया ताकि देश और राज्य खनिज और संपदा के मामले में समृद्ध हो सके।

वहीं इस मौके पर अबूबकर सिद्दीकी ने बताया कि झारखंड खनिज में समृद्ध है और निवेश के लिए सही राज्य है, जिसका उपयोग पर्यावरण सुरक्षा को धयान में रखते हुए विकास और क्षमता विकसित करने के लिए किया जा सकता है।

मुकेश कुमार ने संसाधनों को पुनर्नवीनीकरण के बारे में जानकारी साझा करते हुए बताया कि सामग्रियों को बर्बाद किए बिना पुन: उपयोग करना चाहिए और विकास में योगदान करना चाहिए। शिखर सम्मेलन के मौके पर खनिज , धातु और उद्योग के क्षेत्र में कौशल प्रदान करने वाले संगठनों एवं संस्थाओं के प्रयासों की सराहना करते हुए सम्मानित किया गया। सत्र का अंतिम भाग में भरत जायसवाल , क्षेत्रीय निदेशक एसोचैम , रांची क्षेत्रीय ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

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