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वन कानून में संशोधन को लेकर सदन में हंगामा

रांची। झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन बुधवार को विपक्षी सदस्यों ने भारतीय वन कानून और वनों में रहने वाले जनजातीय परिवारों की सुरक्षा के मुद्दे को लेकर विधानसभा के अंदर और सदन के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया । विपक्षी सदस्यों के शोर-शराबे के कारण प्रश्नोत्तर काल की कार्रवाई पूरी तरह से बाधित रही और सदन की कार्यवाही को दो बार स्थगित करना पड़ा।

पूर्वाह्न 11 बजे विधानसभा की कार्यवाही शुरू होने पर झारखंड मुक्ति मोर्चा के कुणाल षाड़ंगी ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा भारतीय वन कानून में संशोधन किया जा रहा है, इसके तहत वन सुरक्षा में लगे पदाधिकारियों को गोली मारने का आदेश भी देने का प्रावधान है। उन्होंने बताया कि 2006 में पारित वन अधिकार कानून में भी बदलाव का प्रयास किया जा रहा है जिससे पूरे देश में असंतोष का माहौल है। विपक्ष की ओर से इस मुद्दे को लेकर कार्य स्थगन प्रस्ताव भी लाया गया, जिसे विधानसभा अध्यक्ष ने अमान्य कर दिया। कांग्रेस विधायक इरफान अंसारी द्वारा बेरोजगारी के मसले को लेकर भी एक कार्य स्थगन प्रस्ताव लाया गया था इसे भी विधानसभा अध्यक्ष ने अमान्य कर दिया।

जिसके बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस के विधायक अपनी बातों को करते हुए आसन के निकट आ गए। विधानसभा अध्यक्ष ने इन्हें समझाते हुए कहा कि कार्य स्थगन प्रस्ताव को अमान्य कर दिया गया है और जब इस मामले की सुनवाई उच्चतम न्यायालय में चल रही है तो फिर इसे सदन में उठाना उचित नहीं है।

नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेन ने कहा कि विपक्ष सिर्फ राज्य सरकार से यह स्पष्ट करने की मांग करता है कि वन कानून और उच्चतम न्यायालय द्वारा जो राज्य सरकार का पक्ष मांगा गया है उस मसले पर राज्य सरकार का स्टैंड क्या है। उन्होंने कहा कि सदन में अपनी बातों को रखना कहीं से भी किसी न्यायालय के आदेश की अवमानना नहीं है। उन्होंने बताया कि इससे पहले भी फरवरी 2019 में उच्च न्यायालय द्वारा वनों में रहने वाले लाखों जनजातीय परिवारों को हटाने का आदेश दिया था, लेकिन देशव्यापी विरोध के कारण इस पर स्टे लग गया था । झामुमो के ही स्टीफन मरांडी ने ने भी इस मसले पर सरकार से स्टैंड स्पष्ट करने की मंग की गयी।

कांग्रेस विधायक सुखदेव भगत ने कहा कि आज देश के सुदूरवर्ती क्षेत्रों रहने में वाले  तेरह लाख आदिवासी परिवारों के समक्ष विस्थापित होने का संकट गहरा गया है । उन्होंने कहा कि विपक्ष सरकार से  सिर्फ यह मांग कर रहा है कि राज्य सरकार का इस मसले पर स्टैंड क्या है।

विपक्ष को अतिरिक्त संरक्ष्ण मिलने से कार्यवाही बाधित रही-शिवशंकर

सत्तारूढ़ दल के मुख्य सचेतक राधाकृष्ण किशोर ने उच्चतम न्यायालय द्वारा वन अधिकान कानून के संबंध में सभी राज्य सरकारों को पक्ष रखने को कहा है, राज्य सरकार उच्चतम न्यायालय में पक्ष रखेगी, लेकिन इसे सदन में रखना जरूरी नहीं है।  भाजपा के ही शिवशंकर उरांव ने विपक्षी सदस्यों के शोर-शराबे पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि विधानसभा अध्यक्ष की ओर से विपक्ष को साढ़े चार वर्ष में अतिरिक्त संरक्षण दिया गया,जिसके कारण साढ़े तीन वर्ष तक सदन की कार्यवाही बाधित रही।

स्कूली बच्चे विपक्ष की करतूतों को देख रहे है- स्पीकर

विधानसभा अध्यक्ष दिनेश उरांव ने भी विपक्षी सदस्यों के हंगामे पर नाराजगी प्रकट करते हुए कहा कि दर्शक दीर्घा में आज स्कूली बच्चे विपक्षी सदस्यों के करतूतों को देख रहे है। उन्होंने कहा कि आज शिक्षा विभाग से संबधित अहम सवाल पर भी चर्चा होनी थी, लेकिन यह चर्चा नहीं हो, इस कारण हंगामा किया जा रहा है। उन्होंने विपक्षी सदस्यों को शांत कराने की कोशिश के दौरान एक बार यह टिप्पणी भी की कि कुछ विपक्षी सदस्य सदन को हाईजैक करना चाहते हैं। इसका नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेन ने प्रतिवाद करते हुए वे कोई फालतू बात नहीं करते हैं। इस दौरान झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस के कई सदस्य वेल में आकर नारेबाजी कर रहे थे।

विपक्षी सदस्यों के शोर-शराबे के कारण विधानसभा अध्यक्ष ने पूर्वाह्न 11बजकर 42 मिनट पर सभा की कार्यवाही को दोपहर साढ़े बारह बजे तक के लिए स्थगित कर दिया। सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर अपनी बातों को लेकर विपक्ष के कई सदस्य आसन के निकट आकर नारेबाजी करने लगे।

विधानसभा में दो विधेयक पारित

दोपहर दो बजे सभा की कार्यवाही शुरू होने पर झारखंड संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा संशोधन विधेयक 2019 और भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार नियोजन एवं सेवा शर्त विनियमन झारखंड संशोधन विधेयक 2019 को ध्वनिमत से मंजूरी मिल गयी। सत्तारूढ़ भाजपा सदस्यों की मांग पर शिक्षामंत्री डॉ. नीरा यादव ने बताया कि प्रारंभिक विद्यालयों में कार्यरत अर्हर्त्ता प्राप्त शिक्षकों के लिए आरक्षित 25 प्रतिशत पद के अंतर्गत रिक्त पदों को सीधी भर्त्ती से भरे जाने के संबंध में विधि विभाग से परमार्श ली गयी थी और इन पदों को सीधी भर्त्ती से भरने की कार्रवाई की जाएगी। विधानसभा अध्यक्ष ने इन नियुक्तियों के संबंध में इसी विज्ञापन के अनुसार जिलावार और विषयवार रिक्तियों को भरने की सलाह दी और विधानसभा की कार्यवाही गुरुवार पूर्वाह्न 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

सदन में गूंजे जयश्री राम-जय सरना के नारे

रांची। झारखंड विधानसभा के मॉनसून सत्र के तीसरे दिन बुधवार को विपक्षी सदस्य वन अधिकार कानून और वनों में रहने वाले जनजातीय परिवारों की सुरक्षा की मांग को लेकर लगातार शोर शराबा करते रहे।

झारखंड मुक्ति मोर्चा के पौलुस सुरीन ने सदन में वन अधिकार कानून की रक्षा को लेकर जय सरना के नारे लगाये, जिसके जवाब में भाजपा के भी कई सदस्यों ने जयश्री राम और भारत माता की जय के नारे लगाये।

सदर से बाहर निकलने पर कला-संस्कृति, पर्यटन और भू राजस्व मंत्री अमर कुमार बाउरी ने बताया कि पहले झामुमो विधायक पौलुस सुरीन की ओर से धार्मिक नारेबाजी की, जिसके प्रतिवाद स्वरूप सत्तापक्ष के कुछ सदस्यों ने भी नारेबाजी की।

कांग्रेस विधायक सुखदेव भगत ने सदर से बाहर पत्रकारों से बातचीत में कहा कि जयश्रीराम का नाम भक्ति भाव से लिया जाता है, लेकिन सत्तापक्ष के सदस्यों का सदन में आचरण निंदलीय रहा और सदन की मर्यादा का ख्याल भी नहीं रखा गया। उन्होंने कहा कि जयश्रीराम का नारा उपहास उड़ाने के लिए लगाया गया इसमें श्रद्धा की कोई भावना नहीं थी। उन्होंने कहा कि आज लाखों आदिवासियों के विस्थापित होने का खतरा मंडरा रहा है, इस दिशा में सरकार को संवेदनशील होकर पहल करनी चाहिए।

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