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Ahmedabad Blast: इतिहास में पहली बार 38 दोषियों को सुनाई गई फांसी की सजा, पढ़ें पूरी कहानी जब आतंकियों ने कहा था ‘रोक सको तो रोक लो’

Ahmedabad Serial Blast Verdict: अहमदाबाद सीरियल बम ब्लास्ट के मामले में स्पेशल कोर्ट ने दोषियों को सजा सुना दी है. कोर्ट ने 49 में से 38 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई है, जबकि 11 को अजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है.

विशेष अदालत के न्यायाधीश एआर पटेल(A.R. Patel) ने यह फैसला सुनाया है। मौत की सजा गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) और आईपीसी की धारा 302 के प्रावधानों के तहत सुनाई गई। अदालत ने प्रत्येक दोषियों पर 2.85 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया।

इतिहास में ये पहली बार है जब एक साथ इतने सारे दोषियों को फांसी की सजा सुनाई गई है. अदालत में कुल 77 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चला और उनमें 49 को दोषी पाया गया जबकि 28 सबूतों के अभाव में बरी हो गए. उन धमाकों की जिम्मेदारी इंडियन मुजाहिदीन ने ली थी.

 

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यह है पूरी घटना की कहानी

26 जुलाई 2008 को अहमदाबाद में शाम 6 बजकर 45 मिनट पर पहला बम धमाका हुआ था. ये धमाका मणिनगर में हुआ था. मणिनगर उस समय के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी का विधानसक्षा क्षेत्र था. इसके बाद 70 मिनट तक 20 और बम धमाके हुए थे. इन धमाकों में 56 लोगों की मौत हो गई थी और 200 से ज्यादा लोग घायल हुए थे.

ब्लास्ट के अगले ही दिन मुख्यमंत्री के तौर पर नरेंद्र मोदी ने राज्य पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक बुलाई थी. गृह विभाग के कैबिनेट मंत्री का चार्ज उन्हीं के पास था, जबकि अमित शाह उनकी सरकार में गृह राज्यमंत्री थे. मोदी ने तब कहा था कि इस मामले की तह तक जाना है जल्द, बिना देर. मोदी ने कहा था कि अगर गुजरात पुलिस ये केस क्रैक कर लेती है, तो ये सिर्फ गुजरात की नहीं, बल्कि देश की बड़ी सेवा होगी. मोदी रोजाना गुजरात पुलिस के अधिकारियों के साथ बैठक करते रहे, जांच की दशा और दिशा की समीक्षा करते रहे. आखिरकार बीस दिनों में ही इस मा्मले की साजिश से पर्दा उठ गया.

16 अगस्त को गुजरात पुलिस ने इस मामले में बकायदा प्रेस कांफ्रेंस कर साजिश की सारी परतें खोली. जांच के दौरान पता चला कि किस तरह आईएसआई के इशारे पर इंडियन मुजाहिदीन से जुड़े आतंकियों ने साजिश को अंजाम दिया. इस घटना के तार महाराष्ट्र, यूपी, कर्नाटक, केरल से पाकिस्तान तक फैले हुए थे. इसी घटना की जांच के दौरान दिल्ली का बाटला हाउस भी जांच के घेरे में आया और गुजरात पुलिस ने इसकी लीड दिल्ली पुलिस को दी, जिसके आधार पर वहां रेड हुई. जहां तक अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट की साजिश से पर्दा उठाने का सवाल था, ये गुजरात पुलिस के प्रमुख अधिकारियों के साझा प्रयास का नतीजा था.

घटना की पहली लीड वडोदरा के तत्कालीन पुलिस कमिश्नर राकेश अस्थाना ने दी थी, जो अब दिल्ली के पुलिस कमिश्नर हैं. राकेश अस्थाना का ध्यान सिमी के एक मॉड्यूल की तरफ गया था, जिसके कुछ सदस्यों के सीरियल ब्लास्ट में शामिल होने का संकेत मिला. कुछ लीड केंद्रीय खुफिया ब्यूरो को भी मिली थी.

एक और महत्वपूर्ण लीड अहमदाबाद क्राइम ब्रांच के अधिकारियों को भी मिली, जिस क्राइम ब्रांच की अगुआई तब आशीष भाटिया कर रहे थे, जो अब गुजरात के पुलिस महानिदेशक हैं. कुछ और अधिकारी, जिन्होंने जांच में बड़ी भूमिका निभाई, उनमें अभय चूड़ासमा, हिमांशु शुक्ला, तरुण बारोट शामिल हैं.

पहली बार इस केस में मोबाइल टावर्स के लोकेशन के विश्लेषण का बखूबी इस्तेमाल किया गया था. इसमें हिमांशु शुक्ला की पढ़ाई काम आई, जो सिविल सर्विस में आने के पहले आईआईटी खड़गपुर से इलेक्ट्रॉनिक्स में बीटेक कर चुके थे. मुफ्ती बशर को यूपी में पकड़कर लाने वाले शुक्ला ही थे.

तत्कालीन गृह राज्य मंत्री अमित शाह और तब के डीजीपी पीसी पांडे लगातार अधिकारियों की टीम को जरूरी मार्गदर्शन दे रहे थे और जांच में आने वाली अड़चनों को दूर कर रहे थे. बशर को लखनऊ से अहमदाबाद विेशेष विमान से लाने में काफी चुनौतियां, बाधाएं आई, जिसमें खुद मोदी को भी कूदना पड़ा था.

जैसा उस समय गुजरात के सीएम के तौर पर जांच के दौरान नरेंद्र मोदी ने कहा था, अगर अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट का केस क्रैक हो गया, तो ये देश की बड़ी सेवा होगी, वैसा ही हुआ. इस मामले का पर्दाफाश होने के बाद देश में सीरियल ब्लास्ट का सिलसिला थम गया, इंडियन मुजाहिदीन की कमर तोड़ दी गई. गुजरात पुलिस ने बहुत मजबूती से इस मामले को कोर्ट में रखा. केस इतना मजबूत बनाया गया था कि चौदह साल लंबे ट्रायल के दौरान एक-दो अपवाद को छोड़कर आरोपियों को जेल से बाहर आना भी नसीब नहीं हुआ. और आखिरकार जब सजा का ऐलान हुआ, उन परिवारों को सांत्वना मिली है, जिन्होंने अपनों को खोया था

इंडियन मुजाहिदीन ने लिया था गोधरा का बदला

अहमदाबाद में सीरियल ब्लास्ट इंडियन मुजाहिदीन ने 2002 में हुए गोधरा कांड का बदला लेने के लिए किया था। आतंकियों ने टिफिन में बम रखकर उसे साइकिल पर रख दिया था. भीड़-भाड़ और बाजार वाली जगहों पर ये धमाके हुए थे. इन धमाकों में इंडियन मुजाहिदीन (IM) और स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (SIMI) से जुड़े आतंकी शामिल थे. धमाकों में इंडियन मुजाहिदीन के 12 आतंकी शामिल थे. धमाकों से 5 मिनट पहले आतंकियों ने न्यूज एजेंसियों को एक मेल भी किया था जिसमें लिखा था, ‘जो चाहो कर लो. रोक सकते हो तो रोक लो.’

इन 38 दोषियों को मिली फांसी की सजा

1. जहीद कुतबुद्दीन शेख (सिमी के लिए फंड इकठ्ठा किया. इन पैसों के जरिए ब्लास्ट किए गए)

2. इमरान इब्राहीम शेख

3. इकबाल कसम शेख (ठक्करनगर में साइकिल बम रखा, एएमटीएसकी बस नं.150 में ब्लास्ट किया)

4. समसुद्दीन शाहबुद्दीन शेख

5. गयासुद्दीन अब्दुल हलिम अंसारी

6. मोहम्मद आरिफ मोहम्मद इकबाल कागजी

7. मोहम्मद उस्मान महम्मद अनीस अगरबत्तीवाला

8. युनुस मोहम्मद मंसूरी

9. कमरुद्दीन चाँद मोहम्मद नागोरी

10.आमिल परवाज काजी सैफुद्दीन शेख

11. सबली उर्फ साबित अब्दुल करीम मुस्लिम

12. सफदर उर्फ हुसेनभाई उर्फ इकबाल जहरुल हुसेन नागोरी (सिमी के लिए फंड इकठ्ठा किया. पैसों का इस्तेमाल बम ब्लास्ट के लिए किया गया)

13. हाफिज हुसेन उर्फ अदनान ताजुद्दीन मुल्ला

14. मोहम्मद साजिद उर्फ सलीम उर्फ सज्जाद उर्फ साद गुलाम ख्वाजा मंसूरी

15. मुफ्ती अबूबशर उर्फ अब्दुल रशीद उर्फ अब्दुल्ला अबुबकर शेख (ब्लास्ट के लिए मीटिंग्स की, जिहादी भाषण दिए)

16. अब्बास उम्र समेजा

17. जावेद अहमद सगीर अहमद शेख

18. मोहम्मद इस्माइल उर्फ अब्दुल राजिक उर्फ मुसाफ उर्फ फुरकान महमद इसाक मंसूरी (मणिनगर के एलजी अस्पताल में बम का सामन तथा गैस भरी बोतल से भरी कार रखी)

19. अफजल उर्फ अफसर मुतल्लिब उस्मानी (सिविल अस्पताल के ट्रॉमा वार्ड के पास विस्फोटक से भरी हुई कार रख कर ब्लास्ट करवाया)

20. महम्मद आरिफ उर्फ आरिफ बदर उर्फ लदन सन ऑफ बदरुद्दीन उर्फ जुम्मन शेख

21. आसिफ उर्फ हसन बशीरुद्दीन शेख

22. कयामुद्दीन उर्फ रिजवान उर्फ अशफाक सरफुद्दीन कापडिया (झूठे पहचान पत्र से मोबाइल सिम कार्ड लिए)

23. मोहम्मद सेफ उर्फ़ राहुल सागाद एहमद उर्फ़ मिस्टर शेख

24. जीशान एहमद उर्फ़ राहुल साबाद एहमद उर्फे मिस्टर शेख

25. जियाउर रहेमान उर्फ़ मोंटू उर्फ़ जिया अब्दुल रहमानी तेली

26. महम्मद शकील यामिनखान लुहार

27. मोहम्मद अकबर उर्फ़ सईद उर्फ़ याकूब उर्फ़ विनोद इस्माइल चौधरी

28. फ़ज़ले रहेमान उर्फ़ रफीक उर्फ़ सलाउद्दीन मुसद्दिकखान दुर्रानी

29. एहमद बावा उर्फ़ अबू अबूबकर बरेलवी

30. सरफुद्दीन उर्फ़ सरफु सन ऑफ़ ई.टी. सैनुद्दीन उर्फ़ अब्दुल सत्तर उर्फ़ अब्दुल सलाम उर्फ़ सलीम (टाइमर बम बनाने के लिए टाइमर चिप बनाई, बम ब्लास्ट करवाया)

31. सैफुर रहेमान उर्फ़ सैफू उर्फ़ सैफ अब्दुल रहेमान (अलग अलग इलाकों को रेकी की थी, बम वाली साइकिल लेकर नारोल सर्कल इलाके में रखी)

32. सादुली उर्फ़ हारिज़ अब्दुल करीम मुस्लिम

33. मोहम्मद तनवीर उर्फ़ तल्हा मोहम्मद अख्तर पठाण

34. आमीन उर्फ़ राजा अय्यूब शेख

35. महम्मद मुबीन उर्फ़ इरफ़ान अब्दुल शाहरुख़ खान

36. मोहम्मद रफ़ीक़ उर्फ़ जावीद उर्फ़ आलमजेब आफरीदी

37. तौसीफ खान उर्फ़ आतिक एहमदखान पठान

38. मोहम्मद आरिफ नसीम अहमद मिर्ज़ा

 

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